समस्त ब्लॉग/पत्रिका का संकलन यहाँ पढें-

पाठकों ने सतत अपनी टिप्पणियों में यह बात लिखी है कि आपके अनेक पत्रिका/ब्लॉग हैं, इसलिए आपका नया पाठ ढूँढने में कठिनाई होती है. उनकी परेशानी को दृष्टिगत रखते हुए इस लेखक द्वारा अपने समस्त ब्लॉग/पत्रिकाओं का एक निजी संग्रहक बनाया गया है हिंद केसरी पत्रिका. अत: नियमित पाठक चाहें तो इस ब्लॉग संग्रहक का पता नोट कर लें. यहाँ नए पाठ वाला ब्लॉग सबसे ऊपर दिखाई देगा. इसके अलावा समस्त ब्लॉग/पत्रिका यहाँ एक साथ दिखाई देंगी.
दीपक भारतदीप की हिंद केसरी पत्रिका

6/24/2007

अपने रास्ते खुद बनाओ-कविता

सात समन्दर पार जाकर
सोना बटोरने की चाहत
सभी के मन में होती है
विदेशी शहरों की चकाचौंध में
लोग सजा लेते हैं सपने
बुरे लगते हैं सब अपने
शीशे की तरह चमकती सड़कें
उस पर दौड़ती खूबसूरत कार
गीत और नृत्य से
शराब परोसते हुए बार
उसे देखकर सभी को वहां
बसने के हसरत होती

पर किस्मत के खेल होते हैं निराले
नहीं सोच पाते कई समझ वाले
सोने की खान सब को नहीं मिलती
कुछ लोगों के नसीब खुल जाते
रहने के लिए भव्य और विशाल इमारतें
और चलने के लिए कार और वायुयान
बदनसीबों को अवैध आव्रजन के
आरोप में जेल नसीब होती
---------------------
जाओ वहीं तक
जाती है जहाँ तक तुम्हारी नजर
उन ठिकानों का पता भी न पूछो
जहां नहीं होती क़दर

दिन में सपने देखना नहीं अच्छा
अपनी रात की नींद खोना नहीं अच्छा
किसी के भ्रम में मत आओ
अपने रास्ते खुद बनाओ
अपने कदम तभी बढाओ
जब पता हो अपनी डगर

2 टिप्‍पणियां:

Isht Deo Sankrityaayan ने कहा…

कबूतरबाजी के शिकार होकर दुनिया भर की त्रासदी झेलने वालों के लिए अच्छी नसीहत है.

Divine India ने कहा…

अच्छी कविता है…लोगों को इससे कुछ सीखना चाहिए।

लोकप्रिय पत्रिकायें

हिंदी मित्र पत्रिका

यह ब्लाग/पत्रिका हिंदी मित्र पत्रिका अनेक ब्लाग का संकलक/संग्रहक है। जिन पाठकों को एक साथ अनेक विषयों पर पढ़ने की इच्छा है, वह यहां क्लिक करें। इसके अलावा जिन मित्रों को अपने ब्लाग यहां दिखाने हैं वह अपने ब्लाग यहां जोड़ सकते हैं। लेखक संपादक दीपक भारतदीप, ग्वालियर