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दीपक भारतदीप की हिंद केसरी पत्रिका

1/30/2012

इंसानों जैसा दिल है-हिन्दी शायरियां (insan jaisa dil hai-hindi shayriyan)

हम तो खड़े रहे दरख्तों की तरह
कई बार तूफानों का रास्ता बदल दिया,
अब गिरे हैं खुद जमीन पर
अपने ही माली की कुल्हाडियों से कटकर
कहें दीपक बापू
अपना दर्द किससे बयान करें
इस जहान में लोगों ने
सादगी को मूर्खता
और चालाकी का मतलब
गद्दारी में बदल दिया।
-------
खड़े रहना है अपने पांव पर
इस जमीन से रिश्ता तोड़ना
अब मुश्किल है।
आसमान से कभी
सूरज की तपती किरणें
बदन जलायेंगी,
कभी ठंडी हवाओ से
लड़ने का सहारा बन जायेंगी
चंद्रमा कभी अंधेरे में छिप जायेगा,
कभी चांदनी को साथ लायेगा,
कभी हम पानी को तरसेंगे,
कभी बादल अमृत लाकर बरसेंगे,
मगर यह तय है
ऊपर से कोई फरिश्ता
छत पर उम्मीद के आसरे नहीं बरसायेगा,
इंसानों में कोई वक्त पर काम आयेगा,
कहें दीपक बापू
बहुत साथी हैं अपने मतलब के लिये
किसी का इंसानों जैसा भी दिल है।
वि, लेखक एवं संपादक-दीपक भारतदीप, ग्वालियर
poet,writer and editor-Deepak Bharatdeep, Gwaliro
http://rajlekh-patrika.blogspot.com

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1/22/2012

वादे शय हैं-हिन्दी हाईकु (vade shya hain-hindi haiku or poem)

ताबड़तोड़
वादे कर रहे हैं
भूल जायेंगे,

बड़े लोग हैं
भले के नाम पर
माल पायेंगे,

वादे शय हैं
जिनको बेचकर
पैसा लेना है,

बिक जायेंगे
ऊंचे दाम लेकर
भूल जायेंगे,

खरीददार
बदहवास लोग
भ्रम में फंसे

धोखा खाकर
फिर हाथ मलेंगे
भूल जायेंगे।
-----------
खाली हो गया
यकीन का खजाना
कहीं तो ढूंढो,

मुर्दा आशायें
सांस भरो उनमें
फिर से चलें

टूट जायेंगे
तुम्हारे घर भी
यह भी सोचो

भूख बेचते हो
रोटियां दिखाकर
अब न होगा

परदेस का
आसरा तुम्हें है
न इतराओ

हम बिखरे
तुम नहीं बचोगे
खौफ खाओगे

तुम अकेले
अभी तक जिंदा हो
किस्मत से

कालचक्र में
तुम भी शैतान
नाम पाओगे

तुमने फूंकी
यह लूट की आग
बढ़ रही है,

तुम जलोगे
इससे पहले ही
पानी तो ढूंढो।
वि, लेखक एवं संपादक-दीपक भारतदीप, ग्वालियर
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1/11/2012

अदायें और जहान-हिन्दी कविता (adayen aur jahan-hindi kavita or shayari)

किसी पर पत्थर फैंकता हुआ इंसाना नज़र आता है,
मगर दूआऐं देने वाले  शख्स को कौन देख पाता है।
गाली देते और गुर्राते आदमी की आवाज गूंजती है
मगर प्यार करने वाले की सुंगध कौन सूंघ पाता है।
कहें दीपक बापू अदाओं पर फिदा है पूरा जहान
खामोश हमदर्दी का अहसास इंसान नहीं कर पाता है।
जमाने का दिल जीतने के लिये मरे जा रहे शैतानों को
फरिश्तों पर फब्तियां कसकर नाम कमाना खूब भाता है।
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वि, लेखक एवं संपादक-दीपक भारतदीप, ग्वालियर
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