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दीपक भारतदीप की हिंद केसरी पत्रिका

3/03/2015

अज्ञानी फंसते ज्ञानी हंसते-हिन्दी कविता(agyani fanste gyani hanste-hindi poem)



शब्दों के जाल में
अज्ञानी बहुत जल्दी
फंस जाते हैं।

ज्ञानी जानते सच
गंभीर बात का  भी
इसलिये हंस जाते हैं।

कहें दीपक बापू सहनशक्ति
अब नहीं ज़माने में,
सभी लगे पैसा पद और प्रतिष्ठा
जीजान से कमाने में,
कुछ कहो तो
उतारु हो जाते लड़ने
इसलिये हम मौन रहकर
अपने चिंत्तन गुफा में
धंस जाते हैं।
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लेखक एवं कवि-दीपक राज कुकरेजा ‘‘भारतदीप 
ग्वालियर मध्य प्रदेश
Writer and poet-Deepak Raj Kukreja "Bharatdeep"
Gwalior Madhyapradesh


वि, लेखक एवं संपादक-दीपक भारतदीप, ग्वालियर
poet,writer and editor-Deepak Bharatdeep, Gwaliro
http://rajlekh-patrika.blogspot.com

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