समस्त ब्लॉग/पत्रिका का संकलन यहाँ पढें-

पाठकों ने सतत अपनी टिप्पणियों में यह बात लिखी है कि आपके अनेक पत्रिका/ब्लॉग हैं, इसलिए आपका नया पाठ ढूँढने में कठिनाई होती है. उनकी परेशानी को दृष्टिगत रखते हुए इस लेखक द्वारा अपने समस्त ब्लॉग/पत्रिकाओं का एक निजी संग्रहक बनाया गया है हिंद केसरी पत्रिका. अत: नियमित पाठक चाहें तो इस ब्लॉग संग्रहक का पता नोट कर लें. यहाँ नए पाठ वाला ब्लॉग सबसे ऊपर दिखाई देगा. इसके अलावा समस्त ब्लॉग/पत्रिका यहाँ एक साथ दिखाई देंगी.
दीपक भारतदीप की हिंद केसरी पत्रिका

9/24/2017

देशभक्ति का भूत महंगाई से उतर जाता है-दीपकबापूवाणी (Deshbhakati Ka Bhoot mahnagai se utar jata hai-DeepakBapuWani)

 पर्दे के पीछे फर्जी मुद्दे तय करते हैं, चौराहे पर चर्चा में बेकार तर्क भरते हैं।
‘दीपकबापू’ बेअक्ल बुतों का गुण गाते, बिके अक्लमंद सच कहने से डरते हैं।।
---
देशभक्ति का भूत महंगाई से उतर जाता है, सारे भाव महंगा तेज हज़म कर जाता है।
‘दीपकबापू’ राष्ट्रवाद के नशे में डूबे रहते, धीरे धीरे जेब का ख्याल भी भर जाता है।।
---
फायदे के लिये प्रेम तो कभी घृणा व्यापार करें, मतलब के खंजर की तेज धार करें।
‘दीपकबापू’ श्रृंगार कर सजते पर्दे पर चेहरे, पीछे जाकर पैसे का मोटा लिफाफा पर करें।।
---
न सुनने वाले सभी कान बहरे नहीं होते, सोचने वाले सभी दिमाग गहरे नहीं होते।
‘दीपकबापू’ झूठ बेचकर महल बना लिये, ईमानदारों के निवास पर पहरे नहीं होते।।
---

राजपद का नशा सभी पर चढ़ जाता है, भलाचंगा भी घमंड की तरफ बढ़ जाता है।
‘दीपकबापू’ राजमार्ग पर चलते संभलकर, राजवाहन का शिकार तस्वीर में मढ़ जाता है।।
--

1 टिप्पणी:

Pushpendra Dwivedi ने कहा…

खूबसूरत भावनात्मल रचनात्मक अभिव्यक्ति

लोकप्रिय पत्रिकायें

हिंदी मित्र पत्रिका

यह ब्लाग/पत्रिका हिंदी मित्र पत्रिका अनेक ब्लाग का संकलक/संग्रहक है। जिन पाठकों को एक साथ अनेक विषयों पर पढ़ने की इच्छा है, वह यहां क्लिक करें। इसके अलावा जिन मित्रों को अपने ब्लाग यहां दिखाने हैं वह अपने ब्लाग यहां जोड़ सकते हैं। लेखक संपादक दीपक भारतदीप, ग्वालियर