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दीपक भारतदीप की हिंद केसरी पत्रिका

8/22/2010

रिश्ते-हिन्दी शायरी (rishtey-hindi shayari)

नाच न सके नटों की तरह, इसलिये ज़माने से पिछड़ गये।
सभी की आरज़ू पूरी न कर सके, अपनों से भी बिछड़ गये।
महलों में कभी रहने की ख्वाहिश नहीं की थी हमने,
ऐसे सपने देखने वाले हमराहों से भी रिश्ते बिगड़ गये।
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कुछ रिश्ते बन गये
कुछ हमने भी बनाये,
मगर कुछ चले
कुछ नहीं चल पाये,
समय की बलिहारी
कुछ उसने पानी में बहाये।
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8/14/2010

घर के भागीरथ-हिन्दी व्यंग्य कवितायें (ghar ke bhagirath-hindi vyangya kavitaen)

ऐसे भागीरथ अब कहां मिलते हैं,
जो विकास की गंगा घर घर पहुंचायें,
सभी बन गये हैं अपने घर के भागीरथ
जो तेल की धारा
बस!
अपने घर तक ही लायें,
अपने पितरों को स्वर्ग दिलाने के लिये
केवल आले में चिराग जलायें।
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तमाशों में गुज़ार दी
पूरी ज़िदगी
तमाशाबीन बनकर।
कहीं दूसरे की अदाओं पर हंसे और रोए,
कहीं अपने जलवे बिखेरते हुए, खुद ही उसमें खोए,
हाथ कुछ नहीं आया
भले ही रहा ज़माने को दिखाने के लिये
सीना तनकर।
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8/11/2010

वैश्विक उदारीकरण-हिन्दी व्यंग्य कविता (globle marcket-hindi satire poem)

वैश्विक उदारीकरण के चलते
बाज़ार एक हो गया है,
सभी को खुश करते सौदागरों ने
सजा दिये हैं बुत
कहंी धर्म के उदारपंथी
पेशेवराना ममता बरसा रहे हैं
कहीं कट्टरपंथी पाकर मदद
मचाते हैं आतंक
शांति के लिए तरसा रहे हैं।
पहेली बूझ रहे हैं सिद्धांतों की
कुछ प्रायोजित बुद्धिमान लोग
जिनकी चर्चा सौदागरों के भौंपू
चहूं फैलाते हैं,
विज्ञापनों में ही अमन की अपील
और सनसनी दिखलाते हैं,
शक होता है यह देखकर
दंगों की तरह जंग भी
तयशुदा लड़ी जाती होगी,
हादसों की भी कोई पहले रूपरेखा होगी,
मरेगा तो सभी जगह आम आदमी
खरीदेगा भी वही मोमबत्तियां
इसलिये तो हादसों, जंगों और दंगों की
बरसी जोरशोर से मनवाते हैं,
भौंपूओं से आवाज भी लगवाते है,
कसा रहे शिकंजा पाले हुए खास लोगों का
पूरी दुनियां पर
सौदागर इसलिये कर्ज भी बरसा रहे हैं।
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8/07/2010

नया ज़माना-हिन्दी व्यंग्य कवितायें (naya zamana-hindi vyangya kavitaen)

वह प्रतिदिन चौराहे पर आकर
अपना धर्मयुद्ध लड़ेंगे,
इसी तरह ही तो नये बुद्ध बनेंगे।
शांति के मसीहा बनने की ललक ने
कुछ इंसानों को चालाक बना दिया है
वह जानते हैं कि
तभी मिलेगी उनको सिद्धि
जब अपने शोर से
आम इंसानों को क्रुद्ध करेंगे।
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नया जमाना यही है
जिन इंसानों के चरित्र
जितने दागदार हैं,
लोगों की नज़र में वह
उतने ही इज्जतदार हैं।
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